श्री लिंगाष्टकम् (Lingashtakam) | सम्पूर्ण संस्कृत पाठ, हिन्दी अर्थ, लाभ, पाठ विधि एवं शुभ सम

श्री लिंगाष्टकम् का सम्पूर्ण संस्कृत पाठ, हिन्दी भावार्थ, पाठ के लाभ, सही समय, पूजा विधि, फलश्रुति और आध्यात्मिक महत्व एक ही स्थान पर पढ़ें। हर हर महादेव।

Jun 15, 2026 - 10:33
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श्री लिंगाष्टकम् (Lingashtakam) | सम्पूर्ण संस्कृत पाठ, हिन्दी अर्थ, लाभ, पाठ विधि एवं शुभ सम

🕉️ श्री लिंगाष्टकम् (Lingashtakam Stotram)

सम्पूर्ण संस्कृत पाठ, हिन्दी भावार्थ, लाभ, पाठ का समय एवं विधि

श्रीगणेशाय नमः
ॐ नमः शिवाय

॥ श्री लिंगाष्टकम् ॥

ब्रह्ममुरारि सुरार्चित लिङ्गं
निर्मलभासित शोभित लिङ्गम्।
जन्मज दुःख विनाशक लिङ्गं
तत्प्रणमामि सदाशिव लिङ्गम्॥१॥

हिन्दी भावार्थ

मैं उस सदाशिव लिंग को प्रणाम करता हूँ जिसकी ब्रह्मा, विष्णु और देवता पूजा करते हैं, जो निर्मल और तेजस्वी है तथा जन्म-जन्म के दुःखों का नाश करता है।


देवमुनि प्रवरार्चित लिङ्गं
कामदहं करुणाकर लिङ्गम्।
रावणदर्प विनाशन लिङ्गं
तत्प्रणमामि सदाशिव लिङ्गम्॥२॥

हिन्दी भावार्थ

मैं उस करुणामय शिवलिंग को प्रणाम करता हूँ जिसकी देवता और ऋषि पूजा करते हैं, जिसने कामदेव का दहन किया और रावण के अहंकार का नाश किया।


सर्वसुगन्धि सुलेपित लिङ्गं
बुद्धिविवर्धन कारण लिङ्गम्।
सिद्धसुरासुर वन्दित लिङ्गं
तत्प्रणमामि सदाशिव लिङ्गम्॥३॥

हिन्दी भावार्थ

मैं उस शिवलिंग को प्रणाम करता हूँ जो सुगन्धित द्रव्यों से अभिषिक्त है, बुद्धि और विवेक को बढ़ाने वाला है तथा देवता, सिद्ध और असुर भी जिसकी वंदना करते हैं।


कनकमहामणिभूषित लिङ्गं
फणिपतिवेष्टित शोभित लिङ्गम्।
दक्षसुयज्ञ विनाशन लिङ्गं
तत्प्रणमामि सदाशिव लिङ्गम्॥४॥

हिन्दी भावार्थ

मैं उस दिव्य शिवलिंग को प्रणाम करता हूँ जो स्वर्ण और रत्नों से सुशोभित है, नागराज से अलंकृत है तथा जिसने दक्ष के यज्ञ का विनाश किया।


कुङ्कुमचन्दन लेपित लिङ्गं
पङ्कजहार सुशोभित लिङ्गम्।
सञ्चितपाप विनाशन लिङ्गं
तत्प्रणमामि सदाशिव लिङ्गम्॥५॥

हिन्दी भावार्थ

मैं उस शिवलिंग को प्रणाम करता हूँ जो चन्दन और कुमकुम से अलंकृत है, कमलों से शोभित है तथा संचित पापों का नाश करने वाला है।


देवगणार्चित सेवित लिङ्गं
भावैर्भक्तिभिरेव च लिङ्गम्।
दिनकरकोटि प्रभाकर लिङ्गं
तत्प्रणमामि सदाशिव लिङ्गम्॥६॥

हिन्दी भावार्थ

मैं उस सदाशिव लिंग को प्रणाम करता हूँ जिसकी देवगण पूजा करते हैं, जो सच्ची भक्ति से प्रसन्न होता है और करोड़ों सूर्य के समान तेजस्वी है।


अष्टदलोपरिवेष्टित लिङ्गं
सर्वसमुद्भव कारण लिङ्गम्।
अष्टदरिद्र विनाशन लिङ्गं
तत्प्रणमामि सदाशिव लिङ्गम्॥७॥

हिन्दी भावार्थ

मैं उस शिवलिंग को प्रणाम करता हूँ जो समस्त सृष्टि का कारण है और जीवन के अनेक प्रकार के अभावों एवं दरिद्रता का नाश करने वाला है।


सुरगुरु सुरवर पूजित लिङ्गं
सुरवनपुष्प सदार्चित लिङ्गम्।
परात्परं परमात्मक लिङ्गं
तत्प्रणमामि सदाशिव लिङ्गम्॥८॥

हिन्दी भावार्थ

मैं उस परमात्मस्वरूप सदाशिव लिंग को प्रणाम करता हूँ जिसकी देवगुरु और श्रेष्ठ देवता पूजा करते हैं और जो परम सत्य का स्वरूप है।


फलश्रुति

लिङ्गाष्टकमिदं पुण्यं यः पठेत् शिवसन्निधौ।
शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते॥

हिन्दी अर्थ

जो व्यक्ति भगवान शिव के समक्ष श्रद्धापूर्वक लिंगाष्टकम् का पाठ करता है, वह शिवकृपा प्राप्त करता है और अंततः शिवलोक को प्राप्त होकर शिव के सान्निध्य का आनंद पाता है।


🌺 लिंगाष्टकम् पाठ के प्रमुख लाभ

  • 🙏 भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।

  • 🕉️ मन को शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा मिलती है।

  • 💙 नकारात्मक विचारों में कमी आती है।

  • 🌸 भक्ति, श्रद्धा और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।

  • 📿 नियमित साधना से मन एकाग्र होता है।

  • 🪔 शिवपूजन और रुद्राभिषेक का पुण्य बढ़ाने वाला स्तोत्र माना जाता है।

  • ✨ जीवन में सकारात्मकता और आंतरिक संतुलन का अनुभव होता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसके पाठ से पापों का क्षय और शिवकृपा की प्राप्ति होती है। इसे श्रद्धा और सदाचार के साथ करना सर्वोत्तम माना गया है।

🕰️ लिंगाष्टकम् कब पढ़ना चाहिए?

सर्वोत्तम समय

  • 🌅 ब्रह्ममुहूर्त (सूर्योदय से पहले)

  • 🌄 प्रातः स्नान के बाद

  • 🌆 सायंकाल शिव आरती के समय

  • 🌙 प्रदोष काल (सूर्यास्त से पहले और बाद का समय)

  • 🌑 सोमवार

  • 🔱 महाशिवरात्रि

  • 📿 श्रावण मास

  • 🌿 मासिक शिवरात्रि

📿 पाठ करने की सरल विधि

  1. स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

  2. भगवान शिव या शिवलिंग के सामने दीपक जलाएँ।

  3. "ॐ नमः शिवाय" का 11 या 108 बार जप करें।

  4. जल, दूध या बिल्वपत्र अर्पित करें (यदि संभव हो)।

  5. श्रद्धापूर्वक लिंगाष्टकम् का पाठ करें।

  6. अंत में भगवान शिव से प्रार्थना करें और आरती करें।

🌿 क्या महिलाएँ भी लिंगाष्टकम् का पाठ कर सकती हैं?

हाँ। श्रद्धा और भक्ति के साथ कोई भी—स्त्री, पुरुष, वृद्ध या बालक—लिंगाष्टकम् का पाठ कर सकता है। अलग-अलग परम्पराओं में कुछ स्थानीय रीतियाँ हो सकती हैं, लेकिन सामान्य रूप से इसके पाठ पर कोई सार्वभौमिक निषेध नहीं है।

📿 कितनी बार पढ़ें?

  • प्रतिदिन 1 बार – उत्तम

  • सोमवार – 3 या 11 बार

  • श्रावण मास – प्रतिदिन

  • महाशिवरात्रि – विशेष रूप से शुभ

  • समय कम हो तो कम से कम 1 बार श्रद्धापूर्वक पाठ करें।

हर हर महादेव! 🕉️🔱

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